जंगल बचाने वाली महिलाएं रक्षा सूत्र आंदोलन के संस्थापक सुरेश भाई के साथ में।

जंगल को बचाने के लिए डांग गांव की महिलाओं ने किया श्रमदान देहरादून, । रक्षा सूत्र आंदोलन के संस्थापक सुरेश भाई ने कहा है कि सड़क बनाये जाने को लगातार हरे पेड़ों का कटान अनावश्यक रूप से किये जाने के विरोध में ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन की शुरूआत कर दी गई है। डांग गांव
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जंगल बचाने वाली महिलाएं रक्षा सूत्र आंदोलन के संस्थापक सुरेश भाई के साथ में।

जंगल को बचाने के लिए डांग गांव की महिलाओं ने किया श्रमदान

देहरादून, । रक्षा सूत्र आंदोलन के संस्थापक सुरेश भाई ने कहा है कि सड़क बनाये जाने को लगातार हरे पेड़ों का कटान अनावश्यक रूप से किये जाने के विरोध में ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह आंदोलन की शुरूआत कर दी गई है। डांग गांव के ग्रामीण अपनी आवाज को शासन प्रशासन तक पहंुचाने के लिए उत्तरकाशी से दून पहंुचे और उन्होंने अपनी व्यथा को सुनाया।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में सुरेश भाई ने कहा कि वर्तमान में ग्रीन चिपको डांग सत्याग्रह के बैनर तले सरकार द्वारा प्रस्तावित डांग पोखरी मोटर मार्ग के कारण कटने वाले हजारों पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं ने कई बार रक्षा सूत्र बांधे हैं। उनका कहना है कि डांग गांव की मातृशक्ति के नेतृत्व में सारे गांव ने मिलकर अपने जंगल एवं पर्यावरण को नष्ट होने से बचाने के लिए डांग से पोखरी तक श्रमदान से लगभग 560 मीटर सड़क बिना किसी सरकारी सहायता के बना ली है और सड़क पर छोडे बडे दुपहिया और चार पहिया वान भी चलने लगे है।
उनका कहना है कि डांग गांव के ग्रामीण ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के तहत विगत वर्ष 11 दिसम्बर से श्रमदान कर रहे है और गांव वालों ने अपने खेत स्वयं काटकर पेडों को बचाने के उददेश्य से श्रमदान से यह सड़क बनाई है। उनकाक हना हहै कि गांव के ग्रामीणों ने मांग की है कि उनके द्वारा श्रमदान से बनाई गई सड़क को मंजूरी देकर जंगल और पर्यावरण को बचाया जाये। उनका कहना है कि महिलाओं ने ऐसे स्थान से मार्ग का निर्माण किया है जहां न तो वन संपदा का नुकसान हुआ है और लगभग एक हजार पेडों को पिफलहाल कटने से बचा दिया है। उनका कहना है कि महिलाओं ने जो काम सरकार के बडे बडे तकनीकी विशेषज्ञ और इंजीनियर्स नहीं कर पाये है वह काम अपने साहस और मजबूत इरादे के बलबूत
बिना सरकारी मदद के कर दिखा है और आने वाली सरकार के सामने भी गांव के संघर्ष को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जायेगा।
इस अवसर पर डांग की प्रधान रजनी नाथ ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में ही जंगल और पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने श्रमदान से डांग से पोखरी के लिए सड़क बना दी है और पोखरी तक लोक निर्माण द्वारा किये गये समरेखण का विरोध हजारो पेड़ों के बचाने के लिए किया है। उनका कहना है कि गांव के सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक जगूडी ने कहा कि श्रमदान करने के पीछे ग्रामीणों का उददेश्य अपनी स्थानीय संस्कृति, सभ्यता, प्राकृतिक जीवन शैली की सुरक्षा करना है। उनका कहना है कि अपने गौचर, पनघट, जंगल, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना है। उनका कहना है कि मार्ग के पूर्व समरेखण के अनुसार हरे भरे सदाबहार जंगल को काट करके पर्यावरण को नष्ट करने का कोई औचित्य अब नहीं रह गया है। भूमि और वनों के ठेकेदार आपसी सांठगांठ से गांव के जंगल के बीच में सड़क के बहाने अपने रिसार्ट होटल खोलना चाहते है, और उनका उददेश्य सड़क बनाकर जनता का विकास करना नहीं है बल्कि जमीन और जंगल पर कब्जा करके अपना विकास करना है।
इस अवसर पर महिला मंगल दल की अध्यक्ष कुसुम गुसांई ने कहा कि डांग गांव के लोगों ने डांग से पोखरी तक सड़क बनाने के लिए अपन भूमि काटकर सड़क बना दी है और उस सड़क पर गाडियां भी चल रही है। उनका कहना है कि शासन प्रशासन गांव की महिलाओं के संघर्ष का सम्मान करें। इस अवसर पर पर वन पंचायत सरपंच सुलोचना कलूडा ने कहा कि वह जंगल और पर्यावरण के रक्षक है। उनका कहना है कि अपने जंगल और पर्यावरण को बचाने के लिए आगे और अध्कि संघर्ष करेंगें। उनका कहना है कि जंगल जनता का है और पेड़ों के बिना नुकसान पहंुचायें श्रमदान से सडक बना दी है और अब इस सड़क को सरकार और अध्कि सुविधजनक बनाये। पत्रकार वार्ता में रजनी नाथ, कुसुम गुसांई, सुलोचना कलूडा, अनिता गुसांई, संगीता नाथ, बचना बिष्ट, राधिका राणा, चतर सिंह गुसांई, आनंद सिंह बिष्ट, गजेन्द्र सिंह नाथ, विजय पाल नाथ, अभिषेक जगूडी, सुरेश भाई आदि मौजूद रहे।