प्रकृति को निहार प्रफुल्लित हुए लोकगायक नरेंद्र नेगी

देहरादून : उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने जिंदगी की जंग जीत ली है। यह शब्द खुद उनकी जुबां से निकले। हृदयाघात के बाद पिछले सात दिन से मैक्स अस्पताल में भर्ती लोकगायक नेगी की हालत में अब काफी सुधार है। दो दिन पहले ही उन्हें वेंटीलेटर से हटाया गया था। उन्होंने आइसीयू
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देहरादून : उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने जिंदगी की जंग जीत ली है। यह शब्द खुद उनकी जुबां से निकले। हृदयाघात के बाद पिछले सात दिन से मैक्स अस्पताल में भर्ती लोकगायक नेगी की हालत में अब काफी सुधार है। दो दिन पहले ही उन्हें वेंटीलेटर से हटाया गया था। उन्होंने आइसीयू के बेड पर लेटकर मसूरी की आसपास पहाड़ियों के साथ ही तलहटी में हरे-भरे पेड़ का नजारा लिया।

अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि लोकगायक नेगी के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। जिस तरह से वह रिकवर हुए हैं, उनकी बाइपास सर्जरी की नौबत बहुत कम आएगी। बताया गया कि अगले एकाध दिन में उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

नेगी को हृदयाघात के बाद सात दिन पहले सीएमआइ अस्पताल में भर्ती किया गया था। जहां से उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। मैक्स में वह चार दिन वेंटीलेटर पर जिंदगी व मौत के बीच जूझते रहे। अस्पताल में दवा और बाहर प्रशंसकों की दुआओं ने काम किया और अब जिंदगी की जंग जीतकर वह जल्द प्रशंसकों के बीच लौटने वाले हैं।

उन्होंने परिजनों से कहा कि वह पहाड़ व बाहर का नजारा देखना चाहते हैं। इस पर उनका बेड खिड़की की तरफ खिसकाया गया और नेगी ने आइसीयू की खिड़की से मसूरी की पहाडिय़ों व तलहटी पर खड़े हरे-भरे पेड़ों को काफी देर तक निहारा।

कई दिन बाद प्रकृति के इस खूबसूरत नजारे को देख उनका चेहरा खिल उठा। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर, पल्स, शुगर आदि अब नियंत्रित है। सांस लेने में भी उन्हें अब ज्यादा दिक्कत नहीं है। हार्ट भी कुछ हद तक पंपिंग करने लगा है। इसी तरह सुधार होता रहा तो बाइपास की जरूरत नहीं पड़ेगी।