इस गांव के लोगोंं ने तो उगा दिया पूरा जंगल, जानिए

घनसाली : टिहरी जिले की हिंदाव पट्टी की पुर्वालगांव ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने तीन दशक पूर्व पर्यावरण संरक्षण का जो संकल्प लिया था, वह आज हरियाली के रूप में फूल-फल रहा है। एक हेक्टेयर वन भूमि पर तैयार बांज के इस जंगल की देखरेख ग्रामीण स्वयं करते हैं। जंगल को साल में चार माह के
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घनसाली : टिहरी जिले की हिंदाव पट्टी की पुर्वालगांव ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने तीन दशक पूर्व पर्यावरण संरक्षण का जो संकल्प लिया था, वह आज हरियाली के रूप में फूल-फल रहा है। एक हेक्टेयर वन भूमि पर तैयार बांज के इस जंगल की देखरेख ग्रामीण स्वयं करते हैं। जंगल को साल में चार माह के लिए खोला जाता है। इस दौरान महिलाएं अपनी जरूरत के हिसाब से चारा-पत्ती एकत्र करते हैं। ग्रामीण यहां नियमित अंतराल पर पौधरोपण भी करते हैं।
एक दौर में आग लगने से भिलंगना विकासखंड के जंगलों में सब-कुछ स्वाहा हो जाया करता था। तब लोगों के सामने मवेशियों के लिए चारा-पत्ती का संकट भी खड़ा हो जाता। इस स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के तितण गांव नामक तोक में वन भूमि पर बांज के पौधों का रोपण शुरू किया। लेकिन, मवेशी कई बार इस पौध को नष्ट कर देते।
ऐसे में ग्रामीणों ने वन विभाग के सहयोग से वन भूमि के बड़े हिस्से में चाहरदीवारी का निर्माण करवा दिया। इससे क्षेत्र में पशुओं का जाना रुक गया। इसके अलावा ग्रामीणों ने पौधों की देखरेख के लिए गांव से ही एक चौकीदार भी नियुक्त कर दिया। हालांकि, कुछ समय बाद वह खुद ही जंगल की देखरेख करने लगे। नतीजा आज वहां हरा-भरा जंगल लहलहा रहा है।
गांव का प्रत्येक व्यक्ति हर रोज जंगल की देखरेख करता है। साल में दो बार दिसंबर व मार्च में दो-दो महीने जंगल को ग्रामीणों के लिए खोला जाता है। ताकि महिलाएं मवेशियों के लिए चारा-पत्ती जुटा सकें। पुर्वालगांव के पूर्व प्रधान लाखीराम तिवारी बताते हैं कि बांज का जंगल अब काफी घना हो गया है। यदि कभी जंगल में आग लगती है तो ग्रामीण खुद जाकर उसे बुझा देते हैं। तिवारी बताते हैं कि वन विभाग के सहयोग से क्षेत्र में हर साल बांज के पौधे लगाये जाते है और उनकी सुरक्षा के लिए चाहरदीवारी भी की जाती है।
सभी की सहमति से खुलता है जंगल
वर्तमान में पुर्वालगांव में 250 से अधिक परिवार निवास करते है। प्रत्येक परिवार ने मवेशी पाले हुए हैं, जिनके लिए नियमित रूप से चारा-पत्ती की आवश्यकता होती है। जंगल को खोलने से पहले गांव में बैठक की जाती है और फिर उसे ग्रामीणों के लिए खोल दिया जाता है।
फूटने लगे प्राकृतिक जल स्रोत
जंगल में बांज के पेड़ों का घनत्व बढ़ने के कारण जगह-जगह प्राकृतिक जल स्रोत भी फूटने लगे हैं। ऐसे में ग्रामीण अब वहां से गांव तक पेयजल लाइन बिछाने पर विचार कर रहे हैं। ताकि पानी के संकट से भी निजात पाई जा सके।
ग्रामीण खुद करते हैं जंगल की देखभाल
ग्राम पंचायत पुर्वालगांव की प्रधान लीलावती देवी का कहना है कि ग्रामीण खुद जंगल की देखभाल करते हैं। इसी कारण यहां वर्षों से बांज का जंगल संरक्षित है। अन्य गांवों के ग्रामीणों को भी वन सरंक्षण की इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए। इससे लाभ ग्रामीणों को ही मिलना है।