इस शिक्षक की विदाई के दौरान रोने लगा पूरा गांव, जानिए

गोपेश्वर : यह खबर ही कुछ ऐसी है जो सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की छवि को तोड़ती है। चमोली जिले के देवाल ब्लाक में जूनियर हाईस्कूल सुय्या में तैनात शिक्षक विनोद चंद्र का तबादला हुआ तो पूरा गांव उन्हें विदाई देने उमड़ पड़ा। ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच पारंपरिक परिधानों में सजे ग्रामीण गांव की
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गोपेश्वर : यह खबर ही कुछ ऐसी है जो सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की छवि को तोड़ती है। चमोली जिले के देवाल ब्लाक में जूनियर हाईस्कूल सुय्या में तैनात शिक्षक विनोद चंद्र का तबादला हुआ तो पूरा गांव उन्हें विदाई देने उमड़ पड़ा। ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच पारंपरिक परिधानों में सजे ग्रामीण गांव की सीमा तक उन्हें छोड़ने आए और डबडबाई आंखों के साथ विदा किया।

चमोली के इस सुदूरवर्ती गांव की आबादी है आठ सौ। सुय्या गांव तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर की दूरी पैदल नापनी होती है। यहां स्थित जूनियर हाईस्कूल में छात्र-छात्रों की संख्या है 32। सवाल उठना लाजिमी है कि शिक्षक विनोद चंद्र ने ऐसा क्या खास कर दिया।

ग्राम प्रधान हीरा राम के शब्दों में जब गुरुजी वर्ष 2006 में यहां आए थे, तब ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को लेकर निजी स्कूलों का का रूख करने लगे थे। गुरुजी न केवल अभिभावकों को अपने बच्चे सरकारी स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित किया, बल्कि अपने खर्चे से स्मार्ट क्लास का संचालन कर शिक्षा को रोचक भी बनाया और विज्ञान कक्ष का भी निर्माण कराया। हीरा राम बताते हैं कि विनोद चंद्र पुस्तकालय की स्थापना कर ग्रामीणों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी करते रहे।

सहायक अध्यापक विनोद चंद्र विज्ञान पढ़ाते हैं। विनोद बताते हैं कि वर्ष 1996 में पहली तैनाती से अब तक उन्होंने हमेशा दुर्गम स्थानों में ही सेवाएं दी हैं। वह कहते हैं कि पहाड़ों से पलायन का एक बड़ा कारण अच्छी शिक्षा का अभाव भी है। यदि अध्यापक शिक्षण कार्य में रुचि लें तो इस पर कुछ हद तक अंकुश तो लगाया ही जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनका स्थानांतरण जूनियर हाईस्कूल गाड़ी में हुआ है। ग्रामीणों ने विदाई समारोह का आयोजन किया तो उसे भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।