उत्‍तराखंड के चाय बागानों को दिया जाएगा नया स्वरूप

रानीखेत : निजाम बदलते ही उत्तराखंडी चाय का स्वाद बदलने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के चाय बागानों को नया स्वरूप देकर टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने की कवायद के बीच उत्पादन व गुणवत्ता को और बेहतर किया जाएगा। खास बात कि हिमालयी राज्य की चाय का फ्लेवर जानदार बनाने के लिए असम व
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रानीखेत : निजाम बदलते ही उत्तराखंडी चाय का स्वाद बदलने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के चाय बागानों को नया स्वरूप देकर टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने की कवायद के बीच उत्पादन व गुणवत्ता को और बेहतर किया जाएगा। खास बात कि हिमालयी राज्य की चाय का फ्लेवर जानदार बनाने के लिए असम व हिमाचल के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। दल यहां शोध व अध्ययन कर बाकायदा गुणात्मक सुधार संबंधी सुझाव देगा।
राज्य में बेहतर चाय उत्पादन व बेहतर गुणवत्ता के लिए उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड (यूटीडीबी) ने रोड मैप तैयार कर लिया है। बीते वर्ष आखिर में माया नगरी (मुंबई) में उत्तराखंड के विभिन्न बागानों से तैयार जैविक चाय, ग्रीन टी आदि बाहरी प्रदेशों के शौकीनों को खूब पसंद आई थी।
इससे उत्साहित उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने कुमाऊं व गढ़वाल के बागानों को टी-टूरिज्म से जोड़ पौधों की गुणवत्ता और बेहतर करने तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया है। इसके लिए चाय उत्पादन में अव्वल असम व हिमाचल के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ दल उत्तराखंड के बागानों तथा पौधालयों में शोध व अध्ययन करेंगे।
हालिया यूटीडीबी की देहरादून में हुई बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है। चाय विशेषज्ञों का यह दल संबंधित बागान क्षेत्रों की आबोहवा, जलवायु, मृदा व तापमान आदि का अध्ययन कर सुधार के सुझाव ही नहीं देंगे बल्कि यूटीडीबी के तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों व मालियों को महत्वपूर्ण प्रायोगिक जानकारी भी देंगे। ताकि उत्तराखंडी चाय का स्वाद, उत्पादन व गुणवत्ता को और बेहतर किया जा सके। इससे राज्‍य के अन्य माकूल क्षेत्रों में मृदा परीक्षण के जरिये मिट्टी की सेहत सुधार की दिशा में भी काम होगा।
वहीं, उद्यान एवं यूटीडीबी के निदेशक बीएस नेगी का कहना है कि पौधालयों में बेहतर उत्पादन व गुणवत्ता के जरिये उत्तराखंड की चाय को देश दुनिया में नई पहचान तथा बाजार में जगह और अच्छी बनाने के लिये रोडमैप तैयार कर लिया है। असम व हिमाचल के विशेषज्ञों से करार हो चुका है। उन्होंने भी प्रदेश में चाय उत्पादन को बेहतर करने में दिलचस्पी दिखाई है। इससे यूटीडीबी को आर्थिक लाभ के साथ ही बागान व पौधालयों के कामगारों की माली हालत सुधरेगी। चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
राज्य में यहा हैं चाय बागान
कौसानी, चंपावत, घोड़ाखाल भवाली (कुमाऊं) तथा नौटी रुद्रप्रयाग (गढ़वाल) में चाय बागान हैं। इनके अधीन विभिन्न जिलों में 16 पौधालय हैं, जिनमें एक करोड़ पौधे तैयार किए जाते हैं।