सांसों की रिदम समझने ऋषिकेश आऐ थे विनोद खन्ना

ऋषिकेश : 70 के दशक में बिग बी के साथ कई हिट फिल्में कर चुके विनोद खन्ना का तीर्थनगरी से अध्यात्मिक नाता रहा है। 16 वर्ष पूर्व आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रवि शंकर के सानिध्य में विनोद खन्ना ने यहां एक सप्ताह रहे थे। उस दौरान दैनिक जागरण के साथ बातचीत में
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ऋषिकेश : 70 के दशक में बिग बी के साथ कई हिट फिल्में कर चुके विनोद खन्ना का तीर्थनगरी से अध्यात्मिक नाता रहा है। 16 वर्ष पूर्व आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रवि शंकर के सानिध्य में विनोद खन्ना ने यहां एक सप्ताह रहे थे। उस दौरान दैनिक जागरण के साथ बातचीत में उन्होंने बिग बी के साथ एक बार फिर से काम करने की तमन्ना जताई थी। मगर यह हसरत अधूरी रह गई।

बॉलीवुड में अभिनय की लंबी पारी खेलने के बाद विनोद खन्ना ओशो यानी आचार्य रजनीश के शिष्य बन गए थे। वहां पर करीब छह वर्ष बीतने के बाद उन्होंने फिल्म दीवानापन के माध्यम से बड़े परदे पर वापसी की थी। वर्ष 2000 में वह आर्ट ऑफ लिङ्क्षवग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर के संपर्क में आए और अध्यात्मिकता से जुड़े मगर उन्होंने अभिनय नहीं छोड़ा। तीर्थनगरी से उनका विशेष लगाव रहा है। वर्ष 2001 में दो दिसंबर से एक सप्ताह तक चले स्वर्गाश्रम स्थित वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग शिविर में उन्होंने सहभागिता की।

इस शिविर में फिल्म अभिनेता संजय दत्त की पहली पत्नी रिया पिल्लई, अभिनेत्री सोनू वालिया, नगमा सहित अरुंधती राय भी शामिल हुईं थी। इस शिविर में सुदर्शन क्रिया के द्वारा सांसों को बांधना यानी सांसों के रिदम को समझने यह लोग यहां आए थे। छह दिसंबर 2001 को विनोद खन्ना ने दैनिक जागरण  के साथ अंतरंग बातचीत में इच्छा जताई थी कि बिग बी के साथ एक बार फिर काम करने की उनकी तमन्ना है। उनकी यह तमन्ना अधूरी रह गई। 1

6 वर्ष पूर्व बातचीत में उन्होंने बताया था कि ओशो के साथ से वापसी के बाद कई निर्माताओं ने अमिताभ बच्चन और मुझे एक साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया था। मगर अच्छी स्टोरी न बन पाने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उस वक्त राजनीति में शत्रुघ्न सिन्हा की नाराजगी को विनोद खन्ना ने जायज बताते हुए उन्हें केंद्र में मंत्री बनाने की पैरवी की थी और कहा था कि राजनीति सेवा करने का सबसे बड़ा प्लेटफार्म है।

सेवाभाव लेकर ही वह राजनीति में आए थे। राष्ट्रवादी सोच के कारण वह भाजपा में शामिल हुए थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी के प्रंशसक थे। एक समय में सर्वाधिक आतंकवाद ग्रसित पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र को उन्होंने अपना संसदीय क्षेत्र चुना था। विनोद खन्ना का मानना था कि जीवन का यह सफर अजीब होता है। इसमें व्यक्ति की अध्यात्मिक यात्रा अपनी होती है। इस यात्रा में उन्होंने यही पाया कि गंगा की संस्कृति, लोगों में चेतना और अध्यात्म का प्रवाह करती है।