बैठक हुर्इ नहीं और जलपान के नाम पर उड़ाए लाखों

देहरादून : उत्तराखंड वन विकास निगम में फर्जी बिलों से जलपान के नाम पर दो लाख 32 हजार 883 रुपये ठिकाने लगाने की बात पता चली है। जिन बैठकों में जलपान का यह खर्च दिखाया गया है, वह बैठकें आयोजित की भी गईं, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि निगम ने जिन तारीखों
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बैठक हुर्इ नहीं और जलपान के नाम पर उड़ाए लाखों

देहरादून : उत्तराखंड वन विकास निगम में फर्जी बिलों से जलपान के नाम पर दो लाख 32 हजार 883 रुपये ठिकाने लगाने की बात पता चली है। जिन बैठकों में जलपान का यह खर्च दिखाया गया है, वह बैठकें आयोजित की भी गईं, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि निगम ने जिन तारीखों को जलपान सामग्री की खरीद दिखाई है, उन तरीखों और महीनों में किसी तरह की बैठक का आयोजन किया ही नहीं गया। आरटीआइ क्लब के महासचिव एएस धुन्ता की ओर से आरटीआइ में मांगी गई सूचना में यह गोलमाल सामने आया है। इस पर निगम के प्रबंध निदेशक एसटीएस लेप्चा का कहना है कि जांच कराकर जलपान के बिलों का सच सामने लाया जाएगा।

जलपान सामग्री की खरीद के जो बिल आरटीआइ में मिले हैं, वह खुद गोलमाल की तरफ इशारा कर रहे हैं। निगम में एक ही सामग्री के 09 अगस्त 2016 और 12 अगस्त 2016 को दो बिल बनाए गए हैं। इस पर अधिकारियों ने 11 हजार 201 रुपये देकर नगद भुगतान किया है। किसी को बिल पर संदेह न हो, इसके लिए एक जैसी सामग्री के बावजूद एक बिल की राशि में छह रुपये अतिरिक्त जोड़ दिए गए। झूठ को छिपाने के लिए एक बिल अंग्रेजी में तो दूसरा हिंदी में बनाया गया।

जलपान के लिए निगम अधिकारियों ने काजू, बादाम, पिस्ता, चिप्स आदि की खरीद भी दिखाई है, लेकिन किसी भी सामग्री के आगे उसकी मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया। यहां तक कि नोटशीट जैसे अहम दस्तावेज में भी मात्रा दर्ज नहीं की गई। गोलमाल की फेहरिस्त में 16 मार्च 2017 को 43 हजार 449 रुपये का सामान खरीदना दिखाया गया। इसका भुगतान चेक के माध्यम से किया गया, जबकि इसी तारीख को उन्हीं सामग्रियों की खरीद नकद भी दिखाई गई।

14 तारीख को सेवानिवृत्ति समारोह 

यह स्पष्ट है कि किसी भी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति माह के अंतिम दिन 30 या 31 तारीख को होती है और सेवानिवृत्ति का समारोह भी उसी दिन होता है। जबकि वन निगम में एक कर्मचारी का सेवानिवृत्ति समारोह 14 अप्रैल को मनाया गया और उस पर 31 हजार 522 रुपये खर्च होना दिखाया गया। गंभीर यह कि निगम के ही एक आदेश में इस तरह के समारोह के लिए अधिकतम खर्च की सीमा 6000 रुपये तय की गई है।

एक बिल पर लगाया वैट 

आरटीआइ में प्राप्त बिल जून 2016 से मार्च 2017 के बीच के हैं। बिल पर टिन नंबर (तत्कालीन वैट व्यवस्था के तहत) भी अंकित है। इसके बाद भी किसी बिल पर वैट दर्ज नहीं है, जबकि अप्रत्याशित रूप से 14 अप्रैल 2017 के बिल में 13.5 फीसद वैट की दर अंकित की गई है।