शिमला,(विजयेन्द्र दत्त गौतम):भारत सरकार द्वारा नई शिक्षा निति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु टास्क फ़ोर्स का गठन किया जाएगा | इस बावत इतिहास संकलन समिति को जिम्मेदारी दिए जाने के साथ समिति की महत्वपूर्ण भूमिका तय की जा सकती है | संकलन समिति द्वारा भारतवर्ष में स्कूली शिक्षा में प्रत्येक कक्षा के स्तर पर पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी चल रही है | नए पाठ्यक्रम में राज्यवार स्थानीय बोलियों और भाषाओं का ध्यान रखा जा रहा है | इतिहास संकलन समिति की हिप्र इकाई की एक वर्चुअल बैठक में विद्वानों साहित्यकारों और लेखकों द्वारा यह भी खुलासा हुआ है कि मुगलकाल से अब तक भारतवर्ष में शिक्षा स्तर के मापदंड तय किये जाने को लेकर सराहनीय प्रयासों का अभाव रहा है | जबकि इस दौरान असली तथ्यों के साथ जमकर छेड़छाड़ की गईं और भारतीय संस्कृति के गौरवमई इतिहास को शिक्षा के प्राथमिक स्तर से वंचित रखा गया | नई शिक्षा निति में इन सब त्रुटियों और सुझावों का ध्यान रखा गया है | इतिहास संकलन समिति नई शिक्षा निति के अंतर्गत प्राथमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रमों में बदलाव पर शोध के साथ साथ प्राचीन राज्यों के अंतर्गत सामाजिक मूल्यों पर आधारित संस्कृति, कौशल, तकनीक, उपचार, लोक संस्कृति आदि प्रत्येक विधा को खंगाल रही है | संकलन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सूरत ठाकुर ने कहा कि वर्त्तमान में श्रीराम मंदिर के भव्य निर्माण में संकलन समिति के सदस्यों की सराहनीय भूमिका दर्ज की गई है | उन्होंने समिति सदस्यों से श्रीराम मंदिर के निर्माण बावत स्वेच्छिक दान में सहयोग की अपील की | उन्होंने बताया कि नई शिक्षा निति में प्रस्ताव आमंत्रण प्रक्रिया भी जारी है जिसके आधार पर बदलाव सुनिश्चित किए जा सकेंगें | उन्होंने बताया कि विश्वभर सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक भाषा संस्कृत को कक्षा दो से अनिवार्य किया जाने पर भी विचार है | इसके अलावा कक्षा पांचवी के बाद बच्चों के बढ़ते मानसिक विकास को देखते हुए प्रयोगात्मक प्रशिक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया जा रहा है | उन्होंने संकलन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को चीन की विस्तारवादी निति, राममंदिर का संघर्ष और नई शिक्षा निति में विद्वानों की भूमिका पर लेख और विचार आमंत्रित किए | उन्होंने बताया कि हिप्र में स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका और इतिहास से संबंधित विषय पर भी शोध जारी है | उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में स्पष्ट तौर पर उल्लेख है कि उस समय समूचे विश्व का संबंध विश्व व्यापिनी हिन्दू वैदिक संस्कृति से था | भारत की वैदिक संस्कृति समस्त संसार में प्रयोग की जाती थी | उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में बच्चों को छुआछूत जैसी कुरूतियों के अंत तक के इतिहास, भक्ति रचना के प्रसिद्ध साहित्यकारों और कवियों रचनाएं और गुरु गोबिंद सिंह जैसे महान इतिहास के नायकों के बारे में अवगत करवाया जाएगा | उन्होंने बताया कि संकलन समिति अंतर्गत पाठ्यक्रम के साहित्य को एनसीईआरटी से अनुमति के बाद ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा | वर्चुअल संगोष्ठी के दौरान संकलन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने लॉक डाउन के दौरान अपने अपने व्यक्तिगत अनुभव सांझा किए और नई शिक्षा निति में विस्तारवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया | डाक्टर मनोज शर्मा ने अनुमोदन प्रस्तुत करते हुए संकलन समिति के विस्तार पर बल दिया | और समिति में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित किए जाने का आह्वान किया | इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए संकलन समिति ने आगामी समय में नए विद्वानों को समिति सदस्यता दिए जाने का स्वागत किया | वर्चुअल बैठक के दौरान प्रदेशभर से संकलन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों में क्रमवार इंद्र सिंह डोगरा, डाक्टर डीडी वर्मा, डाक्टर सूरत पुंडीर, डाक्टर सुरेश सोनी, डाक्टर विशाल राणा, डाक्टर वीसी बंसल, डाक्टर योगराज महाजन, देशराज शर्मा, दिनेश शर्मा, अंशिका शर्मा, अंशुल शर्मा, पूजा शर्मा, देशराज शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा , रीना शर्मा, सीमा शर्मा, कंवर सिंह नेगी आदि उपस्थित रहे |