देहरादून,। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने राजनीति कम विकास ज्यादा के भरोसे पर एक राष्ट्र एक चुनाव की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के इस सुधार को श्रेष्ठ एवं विकसित भारत के लिए बेहद अहम बताया। वहीं सीएम धामी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में लिए संकल्प को जन जन के सहयोग से पूरा करने का आह्वाहन किया। स्वर्णिम देवभूमि फाउंडेशन द्वारा हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑडिटोरियम में एक राष्ट्र एक चुनाव विषय पर आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन के दौरान प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए जन जागरण अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी श्री बंसल ने कहा बार-बार के चुनाव से देश का विकास और जनकल्याण की योजनाएं बाधित होती हैं। विगत 30 सालों से देखें तो कोई ऐसा वर्ष नहीं रहा जिसमें किसी एक राज्य का चुनाव संपन्न नहीं हुआ हो। अनियंत्रित तरीके से होने वाले यह चुनाव देश की प्रगति में स्पीड ब्रेकर का काम करते हैं हमें एक साथ चुनाव की प्रक्रिया अपनाकर, ऐसे गतिरोधकों को उखाड़ना है। इस सुधार को अपनाकर, देश के राजनीतिक एजेंडा में बड़ा बदलाव आएगा। क्योंकि चुनाव, विकास के मुद्दे पर होंगे और 5 साल में एक बार चुनाव होने से राजनेताओं की जवाबदेही बढ़ेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नया विचार नहीं है बल्कि 1952 से लेकर 1967 तक चार चुनाव देश में इसी प्रक्रिया से संपन्न हुए हैं। दअरसल असल समस्या तब हुई जब इंदिरा गांधी ने राजनैतिक लाभ के लिए एक के बाद एक अनुच्छेद 356 के दुरूपयोग कर चुनी हुई सरकारों को गिराया और देश को चुनावी दलदल में फंसा दिया। आज भी उनका विरोध कांग्रेस और इंडी गठबंधन का पाखंड है। ये विपक्ष की एक ऐसी प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिसमें मोदी सरकार द्वारा उठाए गए किसी भी सुधारात्मक कदम का विरोध किया जाता है श्भले ही वह सार्वजनिक हित के लिए हो।
एक देश एक चुनाव पर तैयार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार द्वारा तैयार इस विधेयक के सभी पहलुओं पर गहन विचार विमर्श के लिए पूर्व राष्ट्रपति एवं संविधानविद श्री रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। जिसमें इस मुद्दे से जुड़े सभी पक्षों से विस्तृत और व्यापक परामर्श कर पूरी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही रिपोर्ट सौंपी गई है। बेहद सरल शब्दों में कहूं तो इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलु है। लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होना। वहीं इस सब प्रक्रिया को सुचारू करने के लिए भी 2034 तक का समय भी लिया गया है। इस कानून को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है, जिसमें संपूर्ण चुनाव प्रणाली, जिसमें चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव अधिकारी, राजनीतिक दल और मतदाता शामिल हुए हैं। साथ ही इसको एकीकृत प्रणाली में बदलने के लिए भी पूरा एक दशक का समय दिया गया है। इस विधेयक निर्माण में पूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। जिसके तहत समिति ने कुल 62 राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे, जिसमें 47 दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, 32 दलों ने समकालिक चुनाव के पक्ष और 15 ने इसका विरोध में राय दी। इसके अतिरिक्त, भारत के 4 पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और 9 हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी इसे संविधान की मूल संरचना के अनुरूप माना है। सभी 4 मुख्य चुनाव आयुक्त, पूर्व राज्य चुनाव आयुक्तों, बार काउंसिल, एसोचौम, फिक्की, और सी.आई. आई के अधिकारियों से भी इस पर विस्तृत चर्चा की गई। वहीं जनता से भी सुझावों मांगे गए , जिनमें 83ः प्रतिक्रियाएं इस विधेयक के पक्ष में सामने आई।
उन्होंने बार-बार चुनाव होने से उत्पन्न होने वाली दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव होने का मतलब है आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने से विकास कार्यों का प्रभावित होना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रक्रिया पर ब्रेक लगना, सरकारी मशीनरी का चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त होने से आम आदमी को दिक्कत आना, बड़ी आर्थिक व्यय की स्थिति का बनना। इसमें चुनावी खर्च की ही बात करें तो एक अनुमान के मुताबिक, केवल 2024 के लोकसभा चुनावों में ही 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए, जो देश के वित्तीय संसाधनों पर एक बड़ी लागत को दर्शाता है। इसके विपरीत, यदि हर पांच साल में एक बार ही चुनाव कराए जाएं, तो चुनाव आयोग को संसाधनों की तैनाती भी केवल एक बार होगी, जिससे लगभग 12 हजार करोड़ रुपए की संभावित बचत हो सकती है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सीएम धामी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह देशहित में क्रान्तिकारी कदम है द्य भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव लोकतंत्र का पर्व होते हैं, लेकिन जब प्रत्येक वर्ष, कभी इस राज्य में, कभी उस राज्य में, बार-बार चुनाव होते हैं, तो यह प्रक्रिया बोझ बन जाती है। उन्होंने कहा कि बार-बार आचार संहिता लगने से विकास कार्य ठप पड़ जाते हैं और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक स्तर पर बार-बार संसाधनों का अपव्यय होता है व सरकारी ख़ज़ाने पर नकारात्मक असर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनावो के दौरान बड़ी संख्या में राज्य के शिक्षकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पुलिस बल और केंद्रीय बल के जवानों को उनके मूल कार्य से हटाकर चुनाव ड्यूटी में लगाना पड़ता है, जिससे उनके मूल कार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर सबको एकजुटता दिखानी होगीद्य
वही इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने एक राष्ट्र एक चुनाव विधेयक विकसित भारत की अनिवार्य शर्त बताया।वहीं कहा, हम सबके लिए खुशी की बात है कि राज्य में संपन्न इस अभियान का यह 50वां कार्यक्रम है। इसके समन्वय का काम देखने वाले श्री रमेश गाड़िया और उनकी समूची टीम को सफल आयोजनों के लिए बधाई दी। साथ ही कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज समूचा देश जिस विकसित भारत निर्माण के लक्ष्य प्राप्ति पर आगे बढ़ रहा है, उसके लिए ष्एक राष्ट्र एक चुनावष् विधेयक बेहद अहम है। आज संसद के अंदर और बाहर, इस मुद्दे पर स्वास्थ्य चर्चा कर, निर्णय लेने का सही समय चल रहा है। सदन के पटल पर इस विधेयक को लेकर बनी उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट है, जहां विस्तृत चर्चा की जाएगी। लेकिन सदन के बाहर जनता के मध्य जनजागरण के लिए हमारा ये अभियान जारी है। एक बात जो सबसे विश्वास के साथ कही जा सकती है कि ये विधेयक देश और देशवासियों के भले के लिए है। और इसे वो लोग भी जानते हैं जिन्होंने 1967 तक इस प्रक्रिया के तहत ही देश में सरकार बनाई, लेकिन आज सिर्फ और सिर्फ राजनैतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं। इस मौके पर विचार व्यक्त करते हुए हेस्को के संस्थापक पदम विभूषण अनिल जोशी ने स्पष्ट कहा कि आम जनता बार-बार के चुनाव से परेशान हो गई है। आज सर्वेक्षण हो तो 90 फ़ीसदी से अधिक लोग एक साथ चुनाव की वकालत करेंगे। क्योंकि चुनावी गतिविधियों के बढ़ने से आम आदमी की जिंदगी प्रभावित होती है और राजनेताओं की जिम्मेदारी बंट कर कम हो जाती है। वही पदमश्री, पूर्व सैन्य अधिकारी एवं प्रसिद्ध पर्वतारोही कन्हैयालाल पोखरियाल ने कहा, जनता के साथ-साथ सैन्य बलों को भी लगातार चुनाव के चलते बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बार बार स्थानांतरण से क्षमता और मनोबल दोनों पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि एक राष्ट्र एक चुनाव के विचार को जन-जन तक पहुंचाएं।
पदमश्री बसंती देवी बिष्ट ने गांव की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, इस सुधार की प्रक्रिया में गांव में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को भी लाना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र की प्रगति में कोई बड़ा न आए। देहरादून महानगर अध्यक्ष सद्धार्थ अग्रवाल के संचालन में हुए इस प्रबुद्ध सम्मेलन में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, विधायक सविता कपूर, ब्रिगेडियर के जी बहल, कर्नल विक्रम थापा, सरदार अमरजीत सिंह, बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट मनमोहन कंडवाल, सरकार में दायित्वधारी ज्योति गैरोला, बलराज पासी विनय रहेला, डॉक्टर देवेंद्र भसीन, विनोद उनियाल, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल यूपी के विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया अश्वनी त्यागी सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, शिक्षाविद्, अधिवक्ता, पूर्व नौकरशाह, साधु संत विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
बार-बार चुनाव से बाधित होती है जनकल्याण की योजनाएं और विकासः बंसल
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