बागेश्वर,। केंद्र सरकार की श्हर घर नल योजनाश् ग्रामीण क्षेत्रों में दम तोड़ रही है। श्हर घर नल, हर घर जलश् पहुंचाने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत शामा क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यहां 11 राजस्व गांवों की प्यास बुझाने के लिए 18.14 करोड़ की भारी-भरकम लागत से स्वीकृत शामा ग्राम समूह ग्रेविटी पेयजल योजना कार्यदायी संस्था जल निगम की सुस्ती और बजट के अभाव में पिछले दो साल से अधर में है।
बता दें कि इस महत्वपूर्ण योजना का निर्माण कार्य 31 मार्च 2024 तक हर हाल में पूरा हो जाना था, लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीतने के दो साल बाद यानी साल 2026 में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिसके चलते ग्रामीणों को पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पानी के इंतजार में ग्रामीणों की आंखें पथरा गई हैं, लेकिन योजना अधर में लटका है। ऐसे में ग्रामीणों को प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझानी पड़ रही है। जल निगम के मुताबिक, शासन से योजना के लिए अब तक महज 10 करोड़ की राशि ही आवंटित हो सकी है। बजट की कछुआ चाल के चलते वर्तमान तक योजना की भौतिक प्रगति सिर्फ 60 फीसदी ही हो पाई है। नतीजा ये है कि 11 गांवों की हजारों की आबादी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
शामा के पूर्व बीडीसी सदस्य नरेंद्र कोंरगा ने बताया कि जनप्रतिनिधि मंचों से पेयजल योजनाओं को लेकर जमकर बड़ी-बड़ी बातें और दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर देखें तो पूरा शामा क्षेत्र आज भी प्यासा है। मार्च 2024 में जो पानी हमारे घरों के नलों में आ जाना था, उसका काम दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है।
शामा के जिला पंचायत सदस्य विजया कोरंगा का कहना है कि पानी की भारी किल्लत के कारण अब ग्रामीणों के सामने अपने मवेशियों को पानी पिलाने तक का संकट खड़ा हो गया है। पानी की कमी से हमारा पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस योजना को अविलंब पूरा करना बेहद जरूरी है।
शामा के ग्राम प्रधान प्रेमा देवी ने ग्रामीणों की पीड़ा रखते हुए कहा कि हमारी ग्रामसभा के नाम पर इतनी बड़ी पेयजल योजना स्वीकृत हुई है, लेकिन अभी तक मुख्य लाइन बिछाने का काम भी शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण आज भी पारंपरिक प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं। हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
वहीं, जल निगम के ईई विपिन कुमार रवि ने बजट अवमुक्त होते ही काम में तेजी लाने की बात कही है। उनका कहना है कि शामा ग्राम समूह ग्रेविटी पेयजल योजना में देरी का मुख्य कारण कुल लागत 18.14 करोड़ के सापेक्ष अब तक केवल 10 करोड़ रुपए का बजट अवमुक्त होना है। शासन स्तर पर शेष राशि की मांग के लिए पत्राचार किया गया है। जैसे ही अगली किस्त मिलेगी, वैसे ही तेजी से काम कराया जाएगा। ताकि, ग्रामीणों को पानी मिल सके।
मजबूरी में प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझा रहे ग्रामीण
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