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National: सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2026 को दिए एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और इसका इस्तेमाल करना हर नागरिक (जिसमें बच्चे भी शामिल हैं) का मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के दायरे के तहत माना है। हाल ही में कुछ राज्यों या देशों द्वारा बच्चों की इंटरनेट या सोशल मीडिया पहुंच पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की चर्चाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने साफ इंकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि केवल ऑनलाइन खतरों या नुकसान का हवाला देकर बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उम्र के आधार पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ऐसे सुरक्षित विकल्प या ‘चाइल्ड मोड’ सेटिंग्स विकसित करने को कहा जो बच्चों को नुकसानदेह सामग्री से बचा सकें।