National: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) का प्रयोग करते हुए नीट-यूजी जेन-जी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज देशव्यापी एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है।
नीट-यूजी 2026 विवाद 3 मई 2026 को परीक्षा आयोजित होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र लीक होने और ‘गेस पेपर’ के असली पेपर से मिलने की खबरों के बाद शुरू हुआ था, जिसके विरोध में देश भर के छात्रों और छात्र संगठनों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी प्रदर्शन किए।
बढ़ते हंगामे और जांच में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंप दी। इसके बाद कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराई गई, लेकिन परिणाम आने के बाद स्कोर में गड़बड़ी के आरोपों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के नेतृत्व में लंबा अनशन तथा ‘संसद चलो’ मार्च जैसे उग्र प्रदर्शन देखने को मिले।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह असाधारण शक्ति देता है कि वह उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले या वाद में ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।

