देहरादून,। उत्तराखंड में घ्विकराल हो चुकी ट्रैफिक समस्या को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने राज्य में घ्ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान“ यानी जीआरएपी आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने घ्की बात की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। अनूप नौटियाल का कहना है कि अब ट्रैफिक जाम उत्तराखंड में केवल पर्यटन सीजन या कुछ विशेष दिनों तक सीमित नहीं रह गया है। चारधाम यात्रा, सप्ताहांत, लंबी छुट्टियां, हिमपात की स्थितियों के कारण लगभग पूरे वर्ष राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी यातायात दबाव बना रहता है।
आने वाले समय में दिल्लीदृदेहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से वाहनों की संख्या का बेहिसाब बढ़ना तय है जबकि पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कें पहले से ही सीमित क्षमता पर हैं।घ् यदि समय रहते ठोस और पूर्व नियोजित व्यवस्था नहीं की गई तो राज्य को यातायात की एक प्रकार की “घ्ट्रैफिक सुनामी” का सामना करना पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप जनजीवन, पर्यावरण और घ्शासन, प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
अनूप नौटियाल ने कहा कि वर्तमान में ट्रैफिक प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था के अभाव में प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ जाता है और आम जनता व पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान“ मॉडल की घ्तर्ज पर उत्तराखंड में भी ट्रैफिक के लिए एक चरणबद्ध, पूर्व-निर्धारित और नियम आधारित व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
प्रस्ताव के अनुसार, उत्तराखंड ट्रैफिक “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान“ को चार चरणों में लागू किया जा सकता है, जिसमें हल्के जाम की स्थिति में ट्रैफिक सूचना, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल, भारी जाम में पार्किंग प्रतिबंध और वाहनों का सीमित प्रवेश, गंभीर जाम की स्थिति में गैर-ज़रूरी भारी वाहनों पर रोक और वर्क-फ्रॉम-होम जैसी व्यवस्था तथा आपात स्थिति में कुछ मार्गों पर अस्थायी पर्यटन रोक और एंबुलेंस व आपदा सेवाओं के लिए सुरक्षित कॉरिडोर शामिल हैं।
अनूप नौटियाल ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए “उत्तराखंड कमीशन फॉर ट्रैफिक मैनेजमेंट“ नाम से एक राज्य-स्तरीय स्वतंत्र संस्था बनाई जानी चाहिए, जो ट्रैफिक डेटा की निगरानी करे, स्थिति के अनुसार “ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान“ के चरण सक्रिय करे और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू की जाती है, तो उत्तराखंड ट्रैफिक प्रबंधन के लिए समर्पित राज्य-स्तरीय आयोग बनाने वाला संभवतः देश का पहला राज्य बन सकता है और यह मॉडल अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सकता है।घ् उन्होंने उम्मीद जताई की मुख्यमंत्री लीक से हटकरघ् उत्तराखंड के हॉट स्पॉट ट्रैफिक एरिया में आगामी “ट्रैफिक सुनामी“ के हालातों को देखते हुए ट्रैफिक मैनेजमेंट के घ्कुछ नए और रचनात्मक सुझावों पर सकारत्मक रुख अपनाएंगे।
संभावित “घ्ट्रैफिक सुनामी” की चुनौती पर मुख्यमंत्री से अग्रिम पहल की अपील
Related Posts
‘अब्दुल सिर्फ दरी बिछाएगा?’ ओवैसी का सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले— ‘मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा’
21 / 100 Powered by Rank Math SEO SEO Score National: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल मुसलमानों…
दून पुस्तकालय में 23 अक्टूबर से शुरू होगा देहरादून किताब कौथिक
63 / 100 Powered by Rank Math SEO SEO Score 75 प्रकाशकों की 80 हजार पुस्तकें होंगी आकर्षण का केन्द्र -साहित्यिक चर्चाओं, बाल लेखन कार्यशाला का भी होगा आयोजन Uttarakhand:…

