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Bollywood: केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) (सेंसर बोर्ड) में हाल ही में बड़े बदलाव किये गए हैं सरकार ने सालों बाद बोर्ड का पुनर्गठन करने के साथ-साथ फिल्मों के सर्टिफिकेशन और एडिटिंग से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया है।
18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का गठन: केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में CBFC बोर्ड (सेंसर बोर्ड) का पुनर्गठन किया है। इस नई टीम की कमान चेयरमैन शशी शेखर वेम्पति के हाथों में है। खास बात यह है कि इस 18 सदस्यीय टीम में मनोरंजन जगत के कई बड़े नामों को शामिल किया गया है, जैसे—पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, रूपाली गांगुली (अनुपमा फेम), पल्लवी जोशी, फिल्ममेकर प्रियदर्शन और ग्रैमी विनर रिकी केज
अब फिल्म मेकर्स के लिए नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं। एक बार जब किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल जाएगा, तो उसके बाद फिल्म में कोई भी कट, सीन जोड़ना (Additions) या रनटाइम को छोटा-बड़ा करना मुमकिन नहीं होगा। फिल्म मेकर्स को केवल वही फाइनल ‘लॉक’ वर्जन सबमिट करना होगा जिसे वे थिएटर्स में दिखाना चाहते हैं।
सरकार के नए संशोधन के मुताबिक, यदि फिल्म में नशीली दवाओं (Narcotic Drugs) या साइकोट्रॉपिक पदार्थों का सेवन, इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है, तो स्क्रीन पर एक अनिवार्य वैधानिक चेतावनी दिखानी होगी। यह चेतावनी होगी: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.”
फिल्मों की श्रेणियों को अधिक स्पष्ट करने के लिए पुरानी ‘UA’ कैटेगरी को तीन नए आयु वर्गों में बांट दिया गया है—UA 7+, UA 13+, और UA 16+। इससे माता-पिता को यह तय करने में आसानी होगी कि कौन सी फिल्म किस उम्र के बच्चों के लिए सही है।
नई गाइडलाइंस के अनुसार, ऐसी फिल्मों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो भारत के मित्र देशों के साथ विदेशी संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।  साथ ही, फिल्मों में अंधविश्वास, राष्ट्रविरोधी सोच या हिंसा को बढ़ावा देने वाले दृश्यों को लेकर नियम सख्त किए गए हैं।