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International: यमन में साल 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है, जहां ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके जवाब में 2015 से सऊदी अरब ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप और हवाई हमले शुरू किए। हालांकि बीच में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से कुछ शांति रही थी।
लेकिन जुलाई 2026 के अंत और सितंबर की शुरुआत में यमन के तटीय इलाकों और रणनीतिक लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में हूतियों ने अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी, जिससे संघर्ष फिर भड़क उठा।
हूतियों की गतिविधियों के बढ़ने पर सऊदी अरब और समर्थित यमनी सेना ने यमन के कई प्रांतों (जो हूतियों के कब्जे में हैं) पर ताबड़तोड़ एयर स्ट्राइक शुरू की। सऊदी विमानों ने हूती ठिकानों, सैन्य अड्डों, रडार सिस्टम और गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया।
सऊदी हमलों के जवाब में हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत (Khamis Mushait) सैन्य एयरबेस, आभा, नजरान और ताइफ जैसे शहरों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे। इन हमलों की वजह से कई नागरिक घायल हुए, सैन्य अड्डों के रनवे और हैंगर को नुकसान पहुंचा, तथा सऊदी के कई दक्षिणी शहरों में आपातकालीन अलर्ट (Emergency Alert) जारी करना पड़ा।
10 सितंबर 2026 को इसी तनाव के बीच सऊदी अरब की बेहद महत्वपूर्ण ‘ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन’ (East-West Pipeline) के पंपिंग स्टेशनों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया गया। इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में भारी उछाल आया और यह 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया।

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