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‘भारत फिर से नकद अर्थव्यवस्था बन सकता है’ अश्नीर ग्रोवर ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर संभावित शुल्कों की आलोचना की

National: भारतपे (BharatPe) के सह-संस्थापक अश्नीर ग्रोवर ने यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क लगने की संभावना की आलोचना करते हुए इसे उपयोगकर्ताओं पर एक छिपा हुआ कर (हिडन टैक्स) करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े भुगतानों पर शुल्क लगने से व्यापारियों और उपभोक्ताओं को वापस नकद (कैश) लेन-देन की ओर लौटने के लिए बढ़ावा मिल सकता है। अश्नीर ग्रोवर ने यूपीआई की सफलता और बैंकों तथा एनपीसीआई (NPCI) के मौजूदा राजस्व का हवाला देते हुए इन शुल्कों की आवश्यकता पर सवाल उठाया है।

सरकार का क्या है कहना

सरकार का कहना है कि यूपीआई अब काफी बड़ा हो चुका है और इसके सुरक्षित संचालन के लिए पैसों की आवश्‍यकता है। ट्रांजेक्‍शन की भारी मात्रा को संभालने के लिए साइबर सेक्रोरिटी और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना मुमकिन नहीं है।
वित्त मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर कोई बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लेगा।  2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्कों को लेकर कानूनी ढांचा तैयार किया गया है, लेकिन स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई शुल्क लगता भी है तो उसका भार आम ग्राहकों पर नहीं बल्कि बड़े व्यापारियों पर होगा।