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चीन और रूस का अंतरिक्ष में हथियार तैनाती पर अमेरिका को कड़ा संदेश

International: चीन ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती को लेकर अमेरिका की आलोचना की है और वाशिंगटन को अंतरिक्ष को युद्ध का मैदान न बनाने की कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिकी वायु सेना के सचिव ट्रॉय मींक (Troy Meink) ने पहली बार पुष्टि की है कि अमेरिका के पास अंतरिक्ष की कक्षा (orbit) में ‘स्पेस कण्ट्रोल हथियार‘ मौजूद है, जो सयुंक्त सैन्य बालो की रक्षा करने में सक्षम हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थन करता है और अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ या उसके सैनिकीकरण का कड़ा विरोध करता है।

अमेरिका द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में ‘स्पेस कंट्रोल हथियार’ तैनात करने की बात स्वीकार करने के बाद रूस ने भी अमेरिका की तीखी आलोचना की है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने कहा कि वाशिंगटन अपने छोटे स्वार्थों के लिए अंतरिक्ष में होने वाले किसी भी सैन्य संघर्ष के विनाशकारी मानवीय परिणामों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है।

1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty – OST)

कोई भी देश अंतरिक्ष की कक्षा में, चंद्रमा पर या किसी अन्य खगोलीय पिंड (जैसे मंगल ग्रह) पर परमाणु हथियार या सामूहिक विनाश के हथियार (WMD) तैनात नहीं कर सकता। चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों का उपयोग केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए ही किया जाएगा। वहां सैन्य ठिकाने बनाना या हथियारों का परीक्षण करना पूरी तरह मना है। कोई भी देश अंतरिक्ष या चंद्रमा के किसी हिस्से पर अपना दावा या संप्रभुता (Sovereignty) नहीं जता सकता। अंतरिक्ष पूरी मानवता की साझी धरोहर है।

इस संधि में एक बड़ी कमी यह है कि यह पारंपरिक हथियारों (Conventional Weapons) या उपग्रह-विरोधी लेजर हथियारों को अंतरिक्ष की कक्षा में तैनात करने से स्पष्ट रूप से नहीं रोकती है। इसी कमी का फायदा उठाकर आज महाशक्तियां स्पेस कंट्रोल हथियार बना रही हैं।